हरिश्चन्द्र बाग, कंचनपुर, 15 जून । नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में परिचालित संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम ने यह निष्कर्ष निकाला है कि केवल विवाद-रहित क्षेत्रों में ही सीमा स्तंभ, दशगजा क्षेत्र का नाप-जोख, मरम्मत तथा पुनर्निर्माण कार्य किया गया है। इसी संदर्भ में कंचनपुर के महेन्द्रनगर में नेपाल और भारत के उच्च अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई।
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सोमवार को कंचनपुर के महेन्द्रनगर स्थित होटल ओपेरा में दोपहर से लगभग चार घंटे तक चली बैठक में दोनों देशों द्वारा तैनात संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम द्वारा अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। बैठक में नेपाल पक्ष से कैलाली, कंचनपुर, डडेल्धुरा, बैतड़ी और दार्चुला के प्रमुख जिला अधिकारी, सुरक्षा निकायों के प्रमुख, वन अधिकारी तथा नापी एवं शहरी विकास के प्रतिनिधि शामिल थे। वहीं भारत पक्ष से लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, उधमसिंहनगर, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों के जिला अधिकारी (डीएम) सहित सुरक्षा एवं वन प्रशासन के उच्च अधिकारी उपस्थित थे।
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कैलाली के प्रमुख जिला अधिकारी हीरालाल रेग्मी की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में सीमा क्षेत्र में देखी जा रही तकनीकी समस्याओं, आवश्यक समन्वय, सीमा प्रबंधन तथा स्तंभ संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के विषय पर गहन चर्चा हुई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि सीमा संबंधी विवाद, अतिक्रमण तथा अन्य संवेदनशील मुद्दों का समाधान आपसी समन्वय और सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से किया जाएगा, ताकि सीमांकन की स्पष्टता बनी रहे।

कंचनपुर के प्रमुख जिला अधिकारी मदन कोइराला के अनुसार संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम द्वारा किए गए कार्य सकारात्मक, उपलब्धिपूर्ण और परिणाममुखी रहे हैं। उन्होंने बताया, “इस अवधि में संयुक्त सर्वे टीम ने विवाद-रहित क्षेत्रों में तेजी से कार्य किया है।” उनके अनुसार नेपाल के सुदूरपश्चिम के पाँच जिले तथा भारत के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पाँच जिलों से जुड़े सीमा क्षेत्रों में केवल उन्हीं स्थानों पर सीमा स्तंभों की स्थिति का अध्ययन, दशगजा क्षेत्र का नाप-जोख तथा आवश्यक मरम्मत कार्य सम्पन्न किया गया जहाँ कोई विवाद नहीं था।
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संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम ने तीन महीने की अवधि में 52 सीमा स्तंभों की मरम्मत, 402 सीमा स्तंभों का निरीक्षण तथा 11 नए सीमा स्तंभों का निर्माण किया है। नापी विभाग के प्रमुख नापी अधिकारी तथा संयुक्त सर्वेक्षण टीम के नेपाल पक्ष के प्रमुख ज्ञानेन्द्र कुमार बिष्ट ने बताया कि कम समय में संतोषजनक उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा, “हमने केवल विवाद-रहित क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य किया है। तीन महीने की अवधि में अच्छा कार्य हुआ है। विवादित और संवेदनशील क्षेत्रों में कोई कार्य नहीं किया गया।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा स्तंभ प्रबंधन में विषम संख्या वाले स्तंभों की मरम्मत, निर्माण और निरीक्षण नेपाल द्वारा तथा सम संख्या वाले स्तंभों का कार्य भारत द्वारा किया जाता है। बिष्ट के अनुसार विवादित और संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का सर्वे या भौतिक निर्माण कार्य नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों का समाधान केवल कूटनीतिक और उच्च स्तरीय संवाद से ही संभव है।

दोनों देशों के सहयोग से 2082 चैत्र के पहले सप्ताह से संयुक्त सीमा सर्वेक्षण टीम का कार्य शुरू किया गया था। निर्धारित अवधि पूरी होने और वर्षा ऋतु शुरू होने के कारण फिलहाल सर्वेक्षण कार्य स्थगित कर दिया गया है। वर्षा समाप्त होने के बाद आवश्यक समन्वय के आधार पर कार्य पुनः शुरू किए जाने की संभावना है।
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बैठक में सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न निकायों के बीच समन्वय को और मजबूत करने, सीमा स्तंभों के संरक्षण को प्रभावी बनाने तथा दशगजा क्षेत्र की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। भारत के उधमसिंहनगर जिले के जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और नेपाल के कैलाली के प्रमुख जिला अधिकारी हीरालाल रेग्मी ने कहा कि सीमा संबंधी विवादों का समाधान शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और आपसी समझदारी के आधार पर करने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं।

हालाँकि सीमा स्तंभ संरक्षण, दशगजा प्रबंधन और सीमा स्पष्टता के लिए यह संयुक्त पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन विवादित क्षेत्रों के स्थायी समाधान के बिना दीर्घकालिक प्रबंधन संभव नहीं दिखता। इसलिए आगामी समय में कूटनीतिक स्तर पर और अधिक संवाद, सहयोग तथा विश्वास का वातावरण निर्माण आवश्यक बताया जा रहा है।
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